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Chhindwara Amma Hospital Case: लापरवाही पर प्रशासन का बड़ा प्रहार, खजरी रोड स्थित अम्मा अस्पताल को बंद करने का अंतिम आदेश, जानें पूरी सच्चाई

छिंदवाड़ा: मर्सी हॉस्पिटल (अम्मा अस्पताल) पर गिरी प्रशासन की गाज, तत्काल प्रभाव से सील करने का आदेश, गर्भवती महिला के इलाज में बरती थी बड़ी लापरवाही

Chhindwara News Update: छिंदवाड़ा शहर के खजरी रोड स्थित मर्सी हॉस्पिटल (अम्मा अस्पताल) के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नरेश गोन्नाडे ने अस्पताल का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश जारी किए हैं। यह कड़ी कार्रवाई दिसंबर 2025 में एक 25 वर्षीय गर्भवती महिला, साक्षी शर्मा के उपचार में बरती गई कथित लापरवाही की जांच रिपोर्ट आने के बाद की गई है।

क्या है पूरा मामला? (The Sakshi Sharma Case)

मृतक साक्षी शर्मा हाई रिस्क प्रेग्नेंसी और हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रही थीं। 17 दिसंबर 2025 को हालत बिगड़ने पर मर्सी हॉस्पिटल में उनका इमरजेंसी सिजेरियन ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद महिला की स्थिति और बिगड़ गई, लेकिन जांच में पाया गया कि अस्पताल में उस वक्त न तो कोई RMO (Residential Medical Officer) मौजूद था और न ही कोई इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर। गंभीर स्थिति में मरीज को केवल नर्सिंग स्टाफ के भरोसे छोड़ दिया गया था। बाद में मरीज को हायर सेंटर रेफर किया गया, जहाँ उनकी मौत हो गई।

जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे: न डॉक्टर, न ICU

विशाल शर्मा द्वारा सीएम हेल्पलाइन और ईमेल के माध्यम से की गई शिकायत के बाद डॉ. धीरज दवंडे और डॉ. श्वेता पाठक के जांच दल ने अस्पताल की कमियों का कच्चा चिट्ठा खोला:

  • विशेषज्ञों की कमी: इमरजेंसी के समय अस्पताल में कोई भी ड्यूटी डॉक्टर या मेडिकल स्पेशलिस्ट मौजूद नहीं था।
  • ICU का अभाव: अस्पताल में गंभीर मरीजों के लिए जरूरी ICU (Intensive Care Unit) की सुविधा ही नहीं पाई गई।
  • मैनेजमेंट की लापरवाही: नर्सिंग स्टाफ ने सुबह 5:00 बजे एनेस्थीसिया विशेषज्ञ को सूचना दी, जबकि मरीज की हालत रात से ही खराब थी।
  • नियमों का उल्लंघन: अस्पताल प्रबंधन ने म.प्र. उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं अधिनियम के प्रावधानों का खुला उल्लंघन किया है।

3 दिन के भीतर मरीज शिफ्ट करने का अल्टीमेटम

CMHO के आदेशानुसार, मर्सी हॉस्पिटल अब नए मरीजों की भर्ती नहीं कर सकेगा। वर्तमान में भर्ती मरीजों को 3 दिनों के भीतर अन्य अस्पतालों या जिला चिकित्सालय छिंदवाड़ा में स्थानांतरित (Shift) करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि औचक निरीक्षण के दौरान अस्पताल संचालित पाया गया, तो प्रबंधन के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।


निष्कर्ष और पाठकों की राय: क्या अन्य निजी अस्पतालों पर भी ऐसी कार्रवाई होगी?

मर्सी हॉस्पिटल पर हुई इस कार्रवाई ने शहर के अन्य निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। छिंदवाड़ा के लोगों में स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता को लेकर चिंता बढ़ गई है।

आपकी क्या राय है? दोस्तों, क्या आपको लगता है कि छिंदवाड़ा के अन्य निजी अस्पतालों की भी इसी तरह बारीकी से जांच होनी चाहिए? क्या केवल अस्पताल बंद करना काफी है या जिम्मेदार डॉक्टरों पर आपराधिक मामला भी दर्ज होना चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर दें और छिंदवाड़ा की इस बड़ी खबर को शेयर करें।

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